स्कूल का पहला दिन

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    पिछले महीने पाँचवा सालगिरह था चीकू का.बहोत खुश था चीकू उस दिन.बडा सा केक,मोमबत्तियाँ,रंगबिरंगे गुब्बारे,ढेर सारे खिलौने..इन सब के बावजूद..अब्बूजान ने उसे विडियो गेम गिफ्ट में दिया था..जिसकी वो काफी दिनों से ज़िद कर रहा था.उसी दिन अम्मी से अब्बूजान ने कहा था की अब चीकू को स्कूल में दाखिला देने का वक़्त आ गया है.
      ….तो..आज चीकू के स्कूल जाने का पहला दिन है.कल अब्बूजान ने उसके लिए नया यूनिफॉर्म,बॅग,कुछ किताबें,जूते ले आए थे. तीन कापीयाँ,ड्रॉइंग बुक और स्केच पेन भी थे.उन्हें घर में सब को दिखाते दिखाते वो दोपहर का खाना भूल गया था.बॅग तो उसे बेहद पसंद आयी थी.उसके फेवरेट कार्टून्स..डोनाल्ड डक और मिकी माउस की तस्वीर,जो बॅग पर छपी थी,वो सारे दोस्तों को दिखाने वाला था.मोहल्ले में रहने वाले रोहन,गुड्डी,हमीद,दीपू सब आज से ही स्कूल जाने वाले थे.कल गार्डन में चोर पुलिस खेलकर वो जल्दीही घर वापस आया था.
    सुबह नहा धोकर नया यूनिफार्म पहनके, टेबल पर पड़ी इत्र की बोतल से कुछ फव्वारे कपड़ों पे छिड़क कर साहब कुछ इस तरह उछल रहे थे..जैसे आज ईद  का दिन हो..इस भाग दौड़ में किचन से गुज़रते वक़्त..कुछ बर्तन जमीं पर रखे हुए थे..उन्हें ठोकर लग गयी.अम्मी ने डाँट लगाकर एक जगह बिठाया.कंघी करवायी,पाउडर लगाया, नए सॉक्स पहनाए.अलहम्दुलिल्लाह और कुलुल्लाह के सुरहे पढ़वाए.चीकू की बॅग तैयार की गयी.
    आज नाश्ते में खीर बनी थी.खाते खाते कुछ छींटे नयी ड्रेस पर गिर गए,तो फिर से अम्मी की डाँट पड़ी.अब्बूजान किसी काम से बाहर गए थे.पर दादी माँ पास में ही थीं,सो,उन्होंने संभाल लिया..’कोई बात नहीं..मेरा राजा बेटा!!’कहके उसके गालों को हलके से सहलाया.’आज स्कूल का पहला दिन है न बेटा..तो ठीक से रहना हाँ..कोई मस्ती-हंगामा मत करना..वहाँ पे टीचर होंगे..अगर तुमने कुछ किया तो वहाँ डाँट नहीं पड़ेगी..सीधे मार पड़ेगी मार..!’ इस मार लफ्ज़ ने माजरा बिगाड़ दिया.पिछली साल मस्जिद के मौलाना ने क़ायदा पढ़ते वक़्त चीकू को गलती करने पर गाल पे चांटा मारा था..तब से उसने उसने वहां जाना छोड दिया था.
    दादी माँ की बात सुनकर उसका मुंह खुला के खुला रह गया.प्लेट में खीर वैसी ही रह गयी.उसका पडोसी दोस्त भोला जो दूसरी कक्षा में पढता है..उसने भी कहा था..’बच्चू..स्कूल में ना..टीचर छड़ी चलाती हैं छड़ी..मैंने तो दो बार सू-सू ही कर ली थी क्लास में’..वो सब याद आकर चीकू ने आँखों में आँसू भर लिए और जोर से चिल्लाया..’मैंने नहीं जाना कोई स्कूल वूल..कभी नहीं..जाना मुझे..’वो बात उसकी बड़ी बहेन ज़ीनत ने सुन ली.तुरंत बोली’ए रोतलू..स्कूल के पहले दिन कोई रोता है क्या.. लड़कियों की तरह..’कहकर वो खिलखिलाके हंसने लगी.अब होना क्या था..चीकू जोर से रोने लगा.
   तभी अब्बू जान की गाडी ने घर के सामने आकर जोर का हॉर्न बजाया.ज़ीनत ‘अब्बू आ गए..अब्बू आ गए’ की रट लगाते हुए गेट की तरफ भागी. चीकू भी हमेशा ऐसा ही करता था.पर आज छोटे मियाँ का मिज़ाज कुछ अलग था..सो नहीं गए.
    अब्बू ने आकर देखा..चीकू स्कूल के लिए तैयार तो है..पर रो रहा है.वे मुस्कुरा दिए और पास आकर आँसू पोंछते हुए बोले..’क्यों जनाब,स्कूल ऐसे ही जाओगे क्या?’ कुछ देर उसने कुछ नहीं कहा..फिर नाक साफ़ करते बोला..’अब्बू..मैं स्कूल नहीं जाऊंगा..वहाँ टीचरें होती हैं..बात बात पर बच्चों को छड़ी से मारती हैं.
    ‘अच्छा! तुम्हें किसने बताया?’
    ‘वो भोला है न भोला..और दादी माँ ने भी’
    ‘ठीक है चीकू..मत जाना स्कूल.. ‘ अब्बूजान ने ठंडी आवाज़ में कहा और वो आँखें बडी कर के उनकी ओर देखने लगा.’हाँ बेटा..मत जाना स्कूल..पर जब तुम्हारे सारे दोस्त चले जाएं..तो अकेले खेलना पड़ेगा तुम्हें..और बड़े होकर पुलिस अफसर बनना है ना तुम्हें..ढिशुम ढिशुम वाले..वो भी नहीं बन पाओगे..तुम्हारी नयी बॅग भी वैसी ही पडी रहेगी..और कल दादी माँ ने तुमसे कहा था ना की रोज स्कूल से आने के बाद एक टॉफी तुम्हे देंगी..अब वो भी नहीं मिलेगी..ठीक है..मत जाओ स्कूल’
    रसोई घर से हँसने की आवाज़ें आईं..अम्मी ने भी उंची आवाज में कहा ‘हाँ चीकू बेटा..बिल्कुल मत जाना..तुम्हारे लिए आज शाम पकौड़े और जामुन बनने वाले थे..सो..मेरा काम तो बच गया..!!अब दाल चाँवल ही खा लेना पेट भर के!’
    दादी माँ और ज़ीनत भी हंसने लगे.सारा घर हंसने लगा..सिवाय चीकू के..!! बेचारा टीचरों की छड़ी..पुलिस अफसर..इनसे ज़्यादा पकौड़े जामुन और दाल चांवल में उलझा हुआ था.अब्बू जान सही कह रहे थे..दोस्तों के साथ भी जाना था..बैग भी दिखानी थी..टॉफी भी चाहिये थी..उसने फैसला कर लिया और यकायक बोला ‘नहीं..नहीं..मुझे स्कूल जाना है..स्कूल जाना है!!’
    तभी दादी माँ पास आईं और दाहिने गाल पर काजल का टीका लगाते हुए कहा..’मेरा राजा बेटा…चीकू..तुम गुड बॉय हो ना..फिर किसलिये डरना..छड़ी का मार तो बॅड बॉय को मिलता है..शरारत नहीं करोगे तो तुम्हें आज दो टॉफियां मिलेंगी और टीचर भी खुश.याद रखना..”पढोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब,खेलोगे कूदोगे तो बनोगे ख़राब”..और शाम को तो तुम्हें खेलना है ही ना..तो स्कूल में बिना किसी शरारत के दिल लगा के पढ़ना हाँ..मेरा गुड बॉय है ..चीकू!!’
   ‘अच्छा दादी माँ!’चीकू ने मुस्कुराते हुए कहा और अब्बूजान की ओर देखके जोर से बोला’अब्बू..जल्दी चलिए..देर हो जायेगी स्कूल के लिए..!!’
   घर एक बार फिर से हंसी से भर गया!!!
  

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